ऐक्सेसिबिलिटी के लिए डिज़ाइन किया गया

AssistiveWare: A World of Possibility

उसने एक दोस्त और दूसरे अनगिनत लोगों की मदद की।

1195 में, Giesbert Nijhuis अपने स्का-रेगे बैंड के साथ यूरोप के टूर पर थे जब उनकी वैन पलटी खाते हुए सड़क से दूर जा गिरी। उस हादसे से Nijhuis को गर्दन के नीचे से लकवा मार गया। वे 26 साल के थे।

पेशेवर ग्राफ़िक डिज़ाइनर और फ़ोटोग्राफ़र Nijhuis कहते हैं, “मैं अपने सिर के अलावा कुछ भी हिला नहीं सकता था, और मेरी साँस लेने की क्षमता सामान्य का आठवाँ हिस्सा रह गई थी। रीढ़ की हड्डी के ठीक होने या सुधरने की तकरीबन कोई उम्मीद नहीं थी।” “शुरू में, मैं ख़ुद से पूछ रहा था कि क्या मैं इस तरह की ज़िंदगी जारी रखना चाहता हूँ।”

Nijhuis के बचपन के दोस्त, David Niemeijer को वह बुरा वक़्त अच्छे से याद है। “उसकी नई शारीरिक चुनौतियों ने उसकी ज़िंदगी को निचोड़कर रख दिया।”

Giesbert Nijhuis (बाएँ) ने अपने दोस्त David Niemeijer (दाएँ) को AssistiveWare बनाने के लिए प्रेरित किया।

उस हादसे ने Nijhuis की ज़िंदगी के हर पहलू पर बुरा असर डाला था, जिसमें उनकी रोज़ी-रोटी भी शामिल थी। अपने Mac पर इमेज को एडिट करने के लिए उन्हें कीबोर्ड की कई कीज़ (keys) एकसाथ दबाने की ज़रूरत पड़ती थी, लेकिन उस वक़्त के असिस्टिव ऑनस्क्रीन कीबोर्ड में यह सहूलियत नहीं होती थी। अपनी नई हालत में––या अपनी “दूसरी ज़िंदगी” में, जैसा कि वे कहना पसंद करते हैं––उन्हें चीज़ों को ऐक्सेस करने में भारी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा था।

इसलिए Niemeijer, जिनके पास कृषि और पर्यावरण विज्ञान की डिग्री है और जो उस वक़्त एक यूनिवर्सिटी में काम कर रहे थे, ने अपना ख़ुद का असिस्टिव कीबोर्ड बनाया – जो Mac ऐप Keystrokes बना। जल्द ही उन्होंने यूनिवर्सिटी में काम के घंटे कम कर दिए ताकि एक सॉफ़्टवेयर कंपनी, AssistiveWare, बनाने पर ध्यान दे सकें, जिसने डेस्कटॉप के लिए नए तरह के ऐक्सेस टूल्स रिलीज़ किए।

और फिर iOS लॉन्च हुआ, जिसने असिस्टिव सॉफ़्टवेयर को डेस्कटॉप से अलग करके Niemeijer के लिए सबकुछ बदल दिया। 2009 में, iOS Software Development Kit लॉन्च होने के ठीक एक साल बाद, AssistiveWare ने अपने क़ामयाब प्रोडक्ट, Proloquo2Go को रिलीज़ किया––जो बाद में Mac के लिए आ गया, यह ऐसा था जैसे Niemeijer घूम-फिरकर वहीं पहुँच गए हों।

Proloquo2Go एक सिम्बल आधारित कीबोर्ड है जो उन लोगों की मदद के लिए बनाया गया है जिन्हें बोलने में मुश्किल होती है।

Proloquo2Go उन लोगों की आवाज़ बनता है जिन्हें बोलने में मुश्किल होती है––proloquo एक लैटिन शब्द है जिसका मतलब है “ज़ोर से बोलना”––इसमें दी हुई सहज ड्रॉइंग को टैप करके आप सेंटेंस बनाते हैं; ऐप उन सेंटेंस को बोलकर पढ़ता है। लेकिन कुछ बने-बनाए सेंटेंस और फ्रेज़ देने के बजाए, Proloquo2Go आपको शब्दों को अनगिनत तरीक़ों से जोड़ने की सहूलियत देता है।

Niemeijer कहते हैं, “यह लोगों को सिर्फ़ सवाल पूछने या जवाब देने जैसी ज़रूरी बातें ही नहीं, बल्कि कहानियाँ या भावुक क़िस्से शेयर करने की सहूलियत भी देता है। इससे वे एक चुटकुला भी सुना सकते हैं।”

iPhone और iPad के पोर्टेबल होने से यह असिस्टिव टेक्नोलॉजी ज़्यादा लोगों तक पहुँच गई : “पहले 7 या 8 साल की उम्र में जाकर एक महंगी मशीन मिला करती थी,” Niemeijer कहते हैं। “iPad या iPod टच के साथ, आप लगभग 2 या 3 साल की उम्र से शुरू कर सकते हैं, जो बहुत फ़र्क पड़ता है, क्योंकि तब कुछ बच्चे आम स्कूलों में जा सकते हैं और उन्हें स्पेशल एजुकेशन पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।” और Mac वर्ज़न के साथ, आप एक ही ऐप को हर डिवाइस पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

फ़िलहाल Mac, iPhone, iPad, और Apple Watch पर AssistiveWare के आधा दर्ज़न ऐप उपलब्ध हैं। जैसे कि, Proloquo4Text (Mac और iOS) एक ऑग्मेंटेटिव और ऑल्टरनेटिव कम्यूनिकेशन (ACC) ऐप है जो आपके लिए बोल सकता है। Pictello (iOS) से आप टेक्स्ट-टू-स्पीच और अपने डिवाइस में मौजूद तस्वीर इस्तेमाल करके स्टोरीबुक बना सकते हैं।

Niemeijer ने जो बनाने में क़ामयाबी हासिल की है उस पर Nijhuis को गर्व है। “मैं यह देखकर बहुत ख़ुश हूँ कि David का काम सिर्फ़ मेरे लिए बनाए हुए सॉफ़्टवेयर से बढ़कर एक ऐसी कंपनी बन गया है, जो दुनिया भर में इतने सारे लोगों को सर्विस देती है।”

यह डिज़ाइनर AssistiveWare के विकास पर लगातार छाप छोड़ रहा है : इन्होंने कंपनी का लोगो और Proloquo2Go ऐप का आइकॉन बनाया था।